शुक्रवार का दिन संतोषी माता तथा लक्ष्मी माता दोनो की पूजा का विशेष दिन है। इस लेख में हम संतोषी माता व्रत की चर्चा करेंगे। इस दिन संतोषी माता का व्रत रखने वाले भक्तो की सभी मनोवान्छित कामनाएं पूर्ण होती है। संतोषी माता दुर्गा माता का ही एक रूप है। यह देवी का सबसे सौम्य रूप माना जाता है। संतोषी माता के व्रत के बारे में माना जाता है कि इन व्रतों को करने से तीन माह के भीतर मनुष्य की इच्छा पूरी हो जाती है, परंतु यदि भाग्य साथ न दे, तो एक वर्ष तक व्रत करने से अवश्य ही अभीष्ट की प्राप्ति होती है। संतोषी माता का व्रत वैसे तो बिल्कुल सरल है, बस इसमें केवल खटाई न खाने का मुख्य नियम है जिसका विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। आइए जानते है, कि संतोषी माता की उत्पत्ति कैसे हुई। संतोषी माता की उत्पत्ति की कथा संतोषी माता की उत्पत्ति के बारे में पुराणो में एक कथा का उल्लेख मिलता है। कथा इस प्रकार है कि भगवान गणेश का विवाह प्रजापति की दो पुत्रियों रिद्धि तथा सिद्धि से हुआ था। सिद्धि तथा रिद्धि ने दो पुत्रों को जन्म दिया। ...
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