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शुक्रवार को कैसे रखे संतोषी माता व्रत

शुक्रवार का दिन संतोषी माता तथा लक्ष्मी माता दोनो की पूजा का विशेष दिन है।  इस लेख में हम संतोषी माता व्रत की चर्चा करेंगे।    इस दिन संतोषी माता का व्रत रखने वाले भक्तो की सभी मनोवान्छित कामनाएं पूर्ण होती है। संतोषी माता दुर्गा माता का ही एक रूप है।  यह देवी का सबसे सौम्य रूप माना जाता है।   संतोषी माता के व्रत के बारे में माना जाता है कि इन व्रतों को करने से तीन माह के भीतर मनुष्य की इच्छा पूरी हो जाती है, परंतु यदि भाग्य साथ न दे, तो एक वर्ष तक व्रत करने से अवश्य ही अभीष्ट की प्राप्ति होती है।   संतोषी माता का व्रत वैसे तो बिल्कुल सरल है, बस इसमें केवल खटाई न खाने का मुख्य नियम है जिसका विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। आइए जानते है, कि संतोषी माता की उत्पत्ति कैसे हुई। संतोषी माता की उत्पत्ति की कथा संतोषी माता की उत्पत्ति के बारे में पुराणो में एक कथा का उल्लेख मिलता है।  कथा इस प्रकार है कि भगवान गणेश का विवाह प्रजापति की दो पुत्रियों रिद्धि तथा सिद्धि से हुआ था।   सिद्धि तथा रिद्धि ने दो पुत्रों को जन्म दिया।  ...

बृहस्पतिवार व्रत की कथा, व्रत विधि तथा उद्यापन विधि

बृहस्पतिवार व्रत का महत्व बृस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु तथा बृहस्पति ग्रह की पूजा का दिवस है।  बृहस्पति ग्रह को गुरु ग्रह भी कहते है क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार वह देवताओं तथा ग्रहों के गुरु माने जाते है।   बृहस्पति ग्रह के नाम पर ही इस दिन को बृहस्पतिवार या गुरुवार कहते है।  इस दिन अपनी कुंडली में बृहस्पति ग्रह को प्रभावशाली बनाने के लिये विष्णु जी की तथा बृहस्पति ग्रह की पूजा की जाती है।   वैसे तो बृहस्पति ग्रह व्यक्ति की कुंडली में विद्या का निर्धारण करता है।  जिसका बृहस्पति गृह अच्छी स्थिति में होता है, वह निर्बाध रूप से विद्यार्जन कर पाता है।   लेकिन बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा तथा व्रत करने से मनुष्य की सभी इच्छायें पूर्ण होती है। बृहस्पतिवार के व्रत की दो प्रचलित कथाएं है, दोनो कथाएं यहां दी जा रही है। बृहस्पतिवार व्रत की पहली कथा बहुत प्राचीन समय में एक नगर में एक सदाचारी राजा का शासन था।  वह राजा बहुत परोपकारी तथा दयालु था, सदा  प्रजा के कल्याण-कार्यो में व्यस्त रहता था।   उनके द्वार पर जो भी कुछ...

बुधवार व्रत की कथा और व्रत विधि

बुधवार व्रत का महत्व सप्ताह के सभी दिनों के नाम ग्रहों के नाम पर आधारित है। सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार के दिन का नाम बुद्ध ग्रह के नाम पर आधारित है।   बुद्धवार का व्रत कुंडली में बुद्ध ग्रह के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिये किया जाता है।  बुद्ध ग्रह मनुष्य की बुद्धि को प्रभावित करता है।  अर्थात, उत्तम बुद्धि के लिये कुंडली में बुद्ध ग्रह का सकारात्मक प्रभाव होना आवश्यक है।   बुद्धि के बिना मनुष्य पशु के समान है, इसलिये अपनी बुद्धि को उन्नत करने के लिये बुद्ध देव की पूजा तथा व्रत किया जाता है।   इस दिन गणेश जी की पूजा करने का भी विधान है, इसका कारण यह है कि गणेश जी बुद्धि के देवता है।  इसलिये बुद्धि के विकास के लिये बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा अवश्य करनी चाहियें। इस व्रत से जुड़ी हुई एक पौराणिक कथा नीचे दी जा रही है। बुधवार व्रत कथा एक नगर में एक साहुकार रहता था।  उसके पास अपार धन -सम्पदा थी।  उसने एक सुंदर, रूपवती तथा गुणवती कन्या से विवाह कर लिया।  विवाह के कुछ समय पश्चात एक बार उसकी पत्नी अपने पीहर गई।   कुछ दिनो ब...

पूर्णिमा के दिन कैसे करें भगवान सत्यनारायण का व्रत

हर मास की अन्तिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है।  इस दिन चन्द्र देव अपनी सोलह कलाओं सहित आकाश में उपस्थित होते है।  यह तिथि व्रत-पूजा, तीर्थ यात्रा तथा पवित्र नदियों में स्नान के लिये अति शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है, इसलिये इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।  इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है।  भगवान विष्णु का यह रूप मनुष्य को सत्य का पालन करना सिखाता है।   जो मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नही छोड़ते, सत्य देव उन्हें अवश्य सुफल देते है तथा उन पर अपनी कृपा की वर्षा करते है। सत्यनारायण भगवान के व्रत की कथा पाँच अध्यायों में विभाजित है।  कथा तथा व्रत विधि नीचे दी जा रही है। एकादशी का महत्व सोमवार का व्रत कैसे रखें सत्य नारायण व्रत कथा  प्रथम अध्याय एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादि अट्ठासी हज़ार ऋषि-मुनि एकत्र हुए। उन्होने वेदों के महान ज्ञाता श्री सूत जी से प्रश्न किया कि कलयुग में मनुष्य का उद्धार किस प्रकार होगा।   वे सभी सूत जी से कोई ऐसा उपाय जानने की इच्छा प्रक...

सोमवार व्रत की कथा और व्रत विधि

  सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा-उपासना तथा व्रत का विधान है।  शास्त्रों के अनुसार सोमवार के दिन विधि विधान पूर्वक भगवान शिव के व्रत रखने तथा कथा का पठन-पाठन करने से महादेव प्रसन्न होते है तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है।   सोमवार का व्रत सबसे सरल व्रत माना जाता है, क्योंकि भोले शंकर की पूजा कैसे भी कर लो, वह बहुत सरलता से प्रसन्न हो जाते है।  इस लेख में सोमवार व्रत की कथा और व्रत की विधि दी जा रही है।  अमावस्या का व्रत कैसे रखें सत्यनारायण व्रत कैसे रखें सोमवार व्रत कथा प्राचीन काल में किसी नगर में एक व्यापारी रहता था।  ईश्वर की कृपा से वह बहुत सम्पन्न जीवन व्यतीत कर रहा था।  उसका व्यापार दूर-दूर तक फैला हुआ था।   वह अपना कार्य पूरी सत्य निष्ठा के साथ करता था, अत: नगर के सामान्य वर्ग में उसे बहुत सम्मानित स्थान प्राप्त था।  अपार धन तथा यश प्राप्त होनें पर भी उसके जीवन में एक दुख था जिसके कारण वह सदैव चिंतित रहता था।   उसके कोई संतान नही थी, यह दुख उसके जीवन के सभी सुखों को अर्थहीन कर रहा था। वह व्यापारी भगवान शिव क...