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Showing posts with the label ईश्वर के अवतार

भगवान शिव के 19 मुख्य अवतार

भगवान शिव के अनेको अवतार है।  जिनमें से 19 मुख्य अवतारों का संक्षिप्त विवरण यहाँ दिया गया है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगो की जानकारी भगवान विष्णु के अवतार 1. वीरभद्र जब माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ के कुंड में कूद कर  आत्मदाह कर लिया था।  तब चारो ओर हाहाकार मच गया।   भगवान शिव को यह घटना पता चली तो क्रोध के वेग में आकर उन्होने अपने बालो की एक जटा उखाड़ कर पर्वत पर पटक कर मारी। उसी जटा से वीरभद्र की उत्पत्ति हुई।   वीरभद्र ने दक्ष के राज्य में चारो ओर विनाश करना आरम्भ कर दिया।  उसके यज्ञ को नष्ट कर दिया और उसकी सैना को भी समाप्त कर दिया।   फिर दक्ष का सिर काट कर वीरभद्र अवतार शान्त हुआ।  दक्ष ने अपनी भूल के लिये भगवान शिव से क्षमा माँगी।  फिर भगवान शिव ने उसके धड़ पर बकरे की गर्दन जोड़ कर उसे जीवित कर दिया और उसे अपने गणों में सम्मिलित कर लिया। 2. पिप्प्लाद पिप्प्लाद ऋषि दधीचि के पुत्र थे।   ऋषि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से ही वृत्तासुर की मृत्यु हो सकती थी।   इसलिये ऋषि दधीचि ने वृत्तासुर...

भगवान विष्णु के 24 अवतार

पुराणो में भगवान विष्णु के 24 अवतारों का वर्णन मिलता है।  यद्यपि विष्णु जी के दस  अवतारों को मुख्य अवतार माना जाता है।   हम इस लेख में विष्णु जी के 24 अवतारों की संक्षिप्त जानकारी देने का प्रयास कर रहे है।  विश्वकर्मा जयन्ती कैसे मनाएं   अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु के कौन से अवतार हुए थे 1. सन्कादि मुनि सन्कादि मुनि चार भाई थे।  इनके नाम थे सनक, सनंदन, सनत और कुमार।  ये चारों ब्रह्मा जी के पुत्र थे।  तथा महायोगी थे।  इन्हें विष्णु जी का प्रथम अवतार माना जाता है।   सन्कादि मुनियों ने भगवान विष्णु के द्वार पालों जय और विजय को दैत्य योनि में जन्म लेने का श्राप दिया था। इसके कारण वह दोनो हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष नाम के दो दैत्य भाईयों के रूप में जन्म लेते है।  तथा उनका उद्धार करने के लिये भगवान विष्णु को कई अवतार लेने पड़े। 2. वराह अवतार भगवान विष्णु का दूसरा अवतार वराह अवतार था।  जंगली सूअर को संस्कृत में वराह कहते है।  उन्होने यह अवतार हिरण्याक्ष से पृथ्वी की रक्षा के लिये लिया था।   हिरण्याक्ष नामक राक्...

नवदुर्गाओं के नाम, रूप और जाप मंत्र

नवदुर्गाओं के रूप और मंत्र नवरात्रों में हम देवी के जिन नौ रूप की उपासना करते है वह माँ आदि शक्ति के ही विभिन्न रूप है।  आइए इन के बारे में विस्तार से जानते है। नवरात्र पूजा और व्रत की जानकारी धनतेरस पर क्या खरीदना होगा शुभ शैलपुत्री प्रथम नवरात्र को माता शैलपुत्री की उपासना की जाती है।  इनका वाहन बैल है तथा यह कमल और त्रिशूल धारण किये हुए है।   माता पार्वती पर्वतराज हिमालय की पुत्री कही जाती है।   इसलिये इन्हें शैलपुत्री भी कहा जाता है।  शैल का अर्थ पत्थर या चट्टान होता है।   यह नौ दिन की  उपासना एक तपस्या की तरह होती है।  माँ की कृपा से चट्टान जैसा दृढ़ संकल्प धारण करें। इनको गाय के घी से बना भोग अर्पित करें।  माँ शैलपुत्री के जाप मन्त्र - ऊँ शैल पुत्र्यै दैव्ये नम:। ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:। ब्रह्मचारिणी माता पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिये हज़ारो वर्ष तक तपस्या की थी।  उन्होने  सब कुछ खाना-पीना छोड़ कर केवल शिव में ही अंतर्मन को लगा लिया था।   उनके इस तपस्विनी रूप का ही ब्रह्मचा...