हर मास की अन्तिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है। इस दिन चन्द्र देव अपनी सोलह कलाओं सहित आकाश में उपस्थित होते है। यह तिथि व्रत-पूजा, तीर्थ यात्रा तथा पवित्र नदियों में स्नान के लिये अति शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है, इसलिये इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु का यह रूप मनुष्य को सत्य का पालन करना सिखाता है। जो मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नही छोड़ते, सत्य देव उन्हें अवश्य सुफल देते है तथा उन पर अपनी कृपा की वर्षा करते है। सत्यनारायण भगवान के व्रत की कथा पाँच अध्यायों में विभाजित है। कथा तथा व्रत विधि नीचे दी जा रही है। एकादशी का महत्व सोमवार का व्रत कैसे रखें सत्य नारायण व्रत कथा प्रथम अध्याय एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादि अट्ठासी हज़ार ऋषि-मुनि एकत्र हुए। उन्होने वेदों के महान ज्ञाता श्री सूत जी से प्रश्न किया कि कलयुग में मनुष्य का उद्धार किस प्रकार होगा। वे सभी सूत जी से कोई ऐसा उपाय जानने की इच्छा प्रक...
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