प्रति माह कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को सन्कष्टि चतुर्थी कहते है। तथा शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहते है। चतुर्थी के दिन गणेश पूजा का विशेष मह्त्व होता है। परंतु माघ माह की सन्कष्टि चतुर्थी वर्ष की सबसे मह्त्वपूर्ण सन्कष्टि चतुर्थी है। इस दिन व्रत और पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। वर्ष की अन्य सन्कष्टि चतुर्थी का व्रत न भी रखें तो माघी सन्कष्टि चतुर्थी का व्रत ही सभी चतुर्थियों का फल देने वाली होती है। सन्कष्टि चतुर्थी का व्रत मातायें अपनी संतानों के लिये रखती है। सन्कष्टि चतुर्थी को आम भाषा में सकट चौथ कहते है। मकर संक्रांति का महत्व सकट चौथ की कथा कार्तिक्य का जन्म तारकासुर के वध के लिये हुआ था। उसके जन्म के लिये ही देवताओं ने भगवान शिव को पार्वती से विवाह के लिये राज़ी किया था। क्योंकि केवल शिव पुत्र ही तारकासुर का वध कर सकता था। कार्तिक्य ने तारकासुर का वध करके बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया था। इस घटना के बाद कार्तिक्य को अपनी योग्यता पर घमंड हो गया ...
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