पापांकुशा एकादशी का महत्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते है। इस दिन भगवान पद्मनाभ की पूजा की जाती है। यह एकादशी मनुष्य के सभी पापों को नष्ट कर के विष्णु लोक का अधिकारी बनाती है। इस व्रत के प्रभाव से महापातक भी नर्क गामी नही होते है तथा उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में भगवान कृष्ण ने इस एकादशी की महिमा का वर्णन किया है। भगवान कहते है कि इस व्रत को करने से मनुष्य की अग्रिम दस पीड़ियों का उद्धार हो जाता है। जीवन पर्यन्त शुभ कर्म करने वाला तथा पापांकुशा एकादशी का पालन करने वाला मनुष्य सुख-सौभाग्य तथा सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है। यदि जीवन भर पाप कर्म करके भी किसी व्यक्ति को अपने अंतिम समय में अपने पापों का भान हो जाए तथा वह पापमय जीवन त्याग कर पापांकुशा एकादशी का व्रत करे तो जीवन पर्यन्त किये गए पापों से मुक्त हो कर मृत्युपरांत परम गति को प्राप्त होता है। भगवान कृष्ण कहते है कि जो मनुष्य बिना कोई पुण्य कर्म किये ही जीवन व्यतीत कर देता है उसका मनुष्य जन्म व्यर्थ है। इ...
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