माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान तथा दान का विशेष मह्त्व माना जाता है। इस दिन संगम पर भारी संख्या में लोग स्नान करने पहुँचते है। क्योंकि यहाँ तीन महानदियों के स्नान का पुण्यफल प्राप्त होता है। परन्तु जो लोग यहाँ से बहुत दूर रहते है, वह अपने आस-पास की अन्य नदियों में स्नान कर लेते है। वैसे भी सभी नदियों को गंगा का ही स्वरूप माना जाता है। यदि किसी भी नदी पर जाना सम्भव न हो सके तो घर में ही स्नान के पानी में दो बूंद गंगाजल डाल कर माँ गंगा का स्मरण करके स्नान कर लिया जाता है। इस दिन अन्न, फल, वस्त्र, तथा अन्य वस्तुओं का यथा सम्भव दान अवश्य करना चाहियें। इस दिन भगवान विष्णु की तथा पीपल की पूजा की जाती है तथा व्रत रखा जाता है। इस दिन मौन व्रत का बहुत मह्त्व है, इसीलिये इसे मौनी अमावस्या कहते है। वास्तव में मौनी अमावस्या मौन व्रत रखनें का दिन है। इस दिन मौन रखने से कुंडली के ग्रहों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वट सावित्री व्रत पूजा वि...
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