कुम्भ का पर्व हिन्दू धर्म के मुख्य पर्वों में से एक है। कुम्भ पर्व के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन, हरिद्वार, प्रयागराज तथा नासिक में स्नान करते है। इन चारों स्थानो पर कुम्भ पर्व पर बहुत बडा मेला लगता है, जिसे कुम्भ का मेला कहते है। कुम्भ के मेले का योग ज्योतिषीय गणना के अनुसार निर्धारित किया जाता है। जब सूर्य के मेष राशि में प्रवेश तथा बृहस्पति के कुम्भ राशि में प्रवेश का योग बन रहा होता है, उसी समय में कुम्भ का पर्व मनाया जाता है। कुम्भ का मेला प्रति 12 वर्ष के बाद आयोजित किया जाता है। प्रति 3 वर्ष के बाद कुम्भ मेला लगता है। जैसे कि जिस समय प्रयाग में संगम पर कुम्भ मेला लगता है। उसके तीन वर्ष बाद उज्जैन में क्षिप्रा नदी पर , फिर 3 वर्ष बाद नासिक में गोदावरी नदी पर और फिर 3 वर्ष बाद हरिद्वार में गंगा नदी पर। इस प्रकार हर स्थान पर यह मेला 12 वर्ष में एक बार लगता है। प्रयाग में 6 वर्ष के बाद अर्ध कुम्भ का मेला भी लगता है। उज्जैन और नासिक में सिंहस्थ कुम्भ मेला लगता है...
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