गुरु का स्थान हमारी संस्कृति में ईश्वर से भी ऊंचा बताया गया है। क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है। इसलिये गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समतुल्य रखा गया है। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:, गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवै नम:।। गुरु पूर्णिमा गुरु को सम्मान देने का एक विशेष दिन है। गुरु पूर्णिमा प्रतिवर्ष आषाड़ी पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म दिवस है। महर्षि वेद व्यास को जगत गुरु माना जाता है। इसलिये इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन महर्षि वेद व्यास की पूजा की जाती है तथा अपने गुरु की पूजा करने का भी प्रचलन है। जिनके कोई गुरु न हो वह केवल वेद व्यास जी की ही पूजा कर लेते है। वट सावित्री व्रत कैसे करें वाल्मीकि जयंती की जानकारी वेद व्यास कौन थे? वेद व्यास का प्रारम्भिक नाम कृष्ण द्वैपायन था। वह पराशर ऋषि के पुत्र थे। वह महान धर्मज्ञ, ब्रह्मज्ञानी तथा त्रिकाल दर्शी थे। वह यह जानते थे कि कलयुग में मानव...
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