बृहस्पतिवार व्रत का महत्व बृस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु तथा बृहस्पति ग्रह की पूजा का दिवस है। बृहस्पति ग्रह को गुरु ग्रह भी कहते है क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार वह देवताओं तथा ग्रहों के गुरु माने जाते है। बृहस्पति ग्रह के नाम पर ही इस दिन को बृहस्पतिवार या गुरुवार कहते है। इस दिन अपनी कुंडली में बृहस्पति ग्रह को प्रभावशाली बनाने के लिये विष्णु जी की तथा बृहस्पति ग्रह की पूजा की जाती है। वैसे तो बृहस्पति ग्रह व्यक्ति की कुंडली में विद्या का निर्धारण करता है। जिसका बृहस्पति गृह अच्छी स्थिति में होता है, वह निर्बाध रूप से विद्यार्जन कर पाता है। लेकिन बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा तथा व्रत करने से मनुष्य की सभी इच्छायें पूर्ण होती है। बृहस्पतिवार के व्रत की दो प्रचलित कथाएं है, दोनो कथाएं यहां दी जा रही है। बृहस्पतिवार व्रत की पहली कथा बहुत प्राचीन समय में एक नगर में एक सदाचारी राजा का शासन था। वह राजा बहुत परोपकारी तथा दयालु था, सदा प्रजा के कल्याण-कार्यो में व्यस्त रहता था। उनके द्वार पर जो भी कुछ...
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