अमावस्या का महत्व 'अमावस्या' अर्थात महीने का वह दिन जब चन्द्रमा प्रकाशहीन होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार एक माह में दो पक्ष होते है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। पूर्णिमा हर माह का अन्तिम दिन होता है उसके अगले दिन से चन्द्रमा की कलाएँ घटना शुरु हो जाती है। इसे कृष्ण पक्ष कहते है। कृष्ण पक्ष के अन्तिम दिन चन्द्रमा पूरी तरह अदृश्य हो जाता है, उस दिन को ही अमावस्या कहते है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, दान, हवन, पूजा तथा व्रत करना बहुत शुभ तथा पुण्यदायी माना जाता है। अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। यह दिन पितरों की पूजा के लिये भी विशेष है। प्रति माह अमावस्या के दिन अपने पितरों का पूजन करना तथा उनके नाम का भोजन निकलना शास्त्र धर्म है। जो लोग हर अमावस्या पर पितरो का तर्पण नही भी करते है वह लोग श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को पितरों का तर्पण अवश्य करते है। एकादशी का महत्व अमावस्या व्रत के लाभ इस दिन व्रत रखने के क्या लाभ है आइए जानते है- चन्द्र ग्रह की प्रकृति शीतल ...
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