योगिनी एकादशी का मह्त्व आषाड़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते है। यह एकादशी सभी प्रकार के पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है। मनुष्य के वर्तमान जीवन के ही नही बल्कि पूर्व जन्मों के पापों को भी काटने वाली यह एकादशी है। इस एकादशी का व्रत रखने वाले मनुष्य जीवन पर्यन्त सांसारिक सुख भोगते है, तथा मृत्यु के उपरांत मोक्ष को प्राप्त करते है। योगिनी एकादशी व्रत कथा धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान योगेश्वर कृष्ण से कहा, हे प्रभु! कृप्या हमें आषाड़ के कृष्ण पक्ष की एकादशी की महिमा भी बताएं। श्री कृष्ण बोले, हे युधिष्ठिर! आषाड़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते है। इसके व्रत से मनुष्य को अपने पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है तथा सभी प्रकार के सुखो की प्राप्ति होती है। यह व्रत, धन, प्रसिद्धी, ऐश्वर्य देने वाला व्रत है, तथा इस व्रत से असाध्य रोगो से भी छुटकारा मिलता है। हे युधिष्ठिर पुराणो में वर्णित यह योगिनी एकादशी व्रत 88 सहस्त्र ब्राह्मणो को भोजन कराने के समान पुण्य फल देने वाला है तथा स्वर्ग की प्...
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