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अजा एकादशी की कथा और व्रत विधि

अजा एकादशी का महत्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते है। शास्त्रों में अजा एकादशी मनुष्य के सभी पापों को हरने  वाली तथा पूर्व जन्म के पापों से भी मुक्ति देने वाली बताई गई है।   यह एकादशी अश्वमेध यज्ञ का पुण्य देने वाली मानी जाती है।  युधिष्ठिर के आग्रह पर भगवान कृष्ण उन्हें एक-एक करके वर्ष की सभी एकादशियों का मह्त्व बताते है जिनका वृत्तांत पद्म पुराण में दिया गया है।   भगवान कृष्ण ने अजा एकादशी के व्रत को मनुष्य के लिये परम कल्याण दायक बताया है। अजा एकादशी की कथा युधिष्ठिर बोले, हे प्रभु! आपने श्रावण की शुक्ल एकादशी का वर्णन किया अब आप कृपा कर के भाद्रपद कृष्ण एकादशी का मह्त्व बताएं। भगवान कृष्ण बोले, हे युधिष्ठिर! इस एकादशी को अजा एकादशी कहते है।  यह  मनुष्य के सभी पापो को नष्ट करने वाला तथा  वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति कराने वाला व्रत है। अत: इसकी कथा ध्यानपूर्वक सुनो। त्रेता युग के समय में इश्वाकु वंश में एक महान तेजस्वी राजा थे जिनका नाम हरीशचंद्र था। वह एक चक्रवर्ती सम्राट थे। उनके सत्य आचरण के कारण उनकी प्रसिद्धि दूर...